उपन्यास विचित्र हत्यारा लेखक कर्नल रंजीत

     विचित्र हत्यारा

  कहानी की शुरुआत होती है एक हवेली से जो फ़ार्म हाऊस के बीचों  बीच बनी हुई है।
  मेजर बलवन्त अपनी कार से घर वापस आ रहे  थे की , उन्हे गोली चलने की आवाज सुनाई देती है
अभी वो उसका अन्दाजा लगाने लगते हैं तभी दुसरी गोली की आवाज भी सुनाई देती है।
     मेजर बलवन्त अपने साथियों के साथ वहा जाते हैं तो उन्हे पता चलता है कि राणा हनुमंत सिंह की बड़ी बहन की हत्या  हो चुकी है और छोटे भाई को पीठ पर गोली लगी है  और ये शायद किसी चोर की हरकत मालुम होती है ।


    अगले दिन मेजर बलवन्त के घर इंस्पेक्टर युधिष्ठिर द्विवेदी आते हैं और उनसे बोलते हैं की वहा पर चोर का नही बल्कि किसी कातिल ने ये सब कुछ किया है। ये सुनकर मेजर वहा जाने के लिए तैयार हो जाते हैं ।
कहानी बहुत ही जबरदस्त है और अंत तक कातिल को जानने की उत्सुकता बनी रहती है और कातिल का पता जब अंत मे चलता है तो पाठक चौक जाता है ।
    इसमे रोचकता बनी रहती है ।सभी उपन्यासों से आलग इनके उपन्यास मे प्रत्येक चैप्टर का शीर्षक है जो उपन्यास पढने मे रोचकता जगाता है
    एक क्लासिक जासूसी उपन्यास है।अवश्य पढ़े।
रेटिंग 10में से 9 है 


        अजीत पांडेय

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