शंखनाद : वेद प्रकाश शर्मा


उपन्यास शंखनाद
लेखक वेद प्रकाश शर्मा

कहानी की शुरुआत होतीहै बैरागी नाम के एक चित्रकार से जो एक चित्र बनाता है जो उसकी बेटी का होता है
     वो उसका चित्र देखता है और कहता है कि मै तुम्हारे कतिलों से बदला लेकर ही रहेगा 
       बलदेव राज भाटिया अपने बेडरूम मे सो रहा होता है कि वहा एक नकाबपोस उसे मारने के इरादे से आता है पर वो सावधान रहता है इसलिए बच जाता है 
      कामदेव धुम्मन एक गायेक और शायर है उसे दो पत्र मिलते हैं जिसमे उसे मुम्बई से दिल्ली आने के लिए लिखा गया है उसे पढकर वो दिल्ली आने के लिए तैयार हो जाता है
       बैरागी के बारे मे ये अफवाह फैलता है कि उसका 6 चित्र बनाने के बाद वो सन्यास ले लेगा पर वो पत्रकारों से कहता है कि ये सब झूठ है कोई उसके नाम से अफवाह फैला रहा है
  उसे एक रहरयमई फोन आता है फोन करने वाला कहता है कि उसे 5 चित्र बनाने हैं वो जिसका चित्र बनाएगा वो उसे मार डालेगा 
    कहानी जबरदस्त है कुछ सस्पेंस है कुछ इमोसनल है पर ये एक बेहतरीन उपन्यास है एक बार पढने लायक है
लास्ट मे वेद जी ने खुद लिखा है कि इसमे सस्पेंस ज्यादा नही है पर कहानी के हिसाब से भरपूर है और जो कहानी की मांग है उस हिसाब से लिखा गया है 
        
  रेटिंग 10 में से 8

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