द ट्रेल - अजिंक्य शर्मा 



द ट्रेल - अजिंक्य शर्मा 

" एक और नई मर्डर मिस्ट्री जिसमे रहस्य के साथ जज्बातों का सैलाब भी है जिसमे आप खो जाएंगे । कातिल को पकड़ने में इस बार पाठकों को बहुत मशक्कत करनी होगी । अंत काफी चौकाने वाला है ।"
द ट्रेल अजिंक्य शर्मा का सातवां उपन्यास है और  उनके पहले उपन्यास "मौत अब दूर नही " को पाठकों से अच्छा प्रतिसाद मिला था जिसके कारण  लेखक से पाठकों की उम्मीद बढ़ गई थी जिस पर 
"द ट्रेल ' के माध्यम से लेखक 100 प्रतिशत खरे उतरे है ।और मिस्ट्री लेखक के रूप में अपना सिक्का एक बार फिर से जमाने मे सफल रहे है।
"द ट्रेल " को मैंने एक बार पढ़ना शुरू किया तो खत्म करके ही माना। उपन्यास का अंत काफी हैरत अंगेज है  उनके अन्य उपन्यास से इतर इसमें जज्बातों का तूफान भी है । ऐसी "मर्डर मिस्ट्री" की आप भी खुद को जासूस मानते हुवे कातिल की तलाश करने लग जाएंगे। 

रंजीत विस्वास  एक प्रसिद्ध मिस्ट्री लेखक है और पब्लिशिंग हाउस का मालिक है ।एक रात अचानक उसका खून हो जाता है और वह दीवार पर लिखकर जाता है 
"United we rise "   जबकि कोई भी मरने से पहले अपने कातिल का नाम लिखना चाहेगा।
घटना स्थल पर मिलते है सिर्फ जूतों के निशान और रंजीत विस्वास के गले में फंसे कांच के टुकड़े 
जिसके बाद शुरू होती है मर्डर की इन्वेस्टीगेशन और इंस्पेक्टर हितेश कश्यप इसमें तब उलझ कर रह जाता है जब एक संदिग्ध कातिल की भी हत्या हो जाती है।
इस केस में एक के एक मोड़ आते है और रंजीत विस्वास की सेक्रेटरी और उसकी विस्वास पात्र शैली पर जब शक की सुई जाती है तो.एक के बाद एक खुलासे होते है।
कहानी के बारे में ज्यादा बताना पाठकों के साथ नाइंसाफी होगी ।
शुरू से आखरी तक रहस्य को बनाकर रखने में लेखक सफल हुवे है और शैली का पात्र पाठकों को खूब पसंद आने वाला है और बरबस ही आपको वेदप्रकाश शर्मा की विभा जिंदल की याद दिला देती है।
"कातिल कितना ही शातिर हो वो अपने पीछे सबूत छोड़ ही जाता है " और अंततः पकड़ा जाता है। 
रंजीत विस्वास को किसने मारा?
क्यो रंजीत विस्वास ने लिखा "united we rise"
दो दो खून  की साजिश के पीछे कौन था ?
ताज का क्या रहस्य था?
इसके लिए आपको उपन्यास पढ़ना होगा।
उपन्यास किंडल पर उपलब्ध है।

समीक्षा : संजय आर्य


No comments:

Post a Comment