Fly dream publications
क्या आपको ऐसी कहानी वाला उपन्यास पसंद है
जो कि आपकी सारी थ्योरी की दिशा और दशा बदल दे??
तो यह उपन्यास आपके लिए ही है ।
उपन्यास के लेखक दिलशाद अली जी का कहना है कि वह अनेक उपन्यासों के अध्ययन से ही लेखन की प्रेरणा पाएं हैं ।
यह उपन्यास लेखक का पहला शाहकार है और निसंदेह वह अपने पाठकों की मेहनत का पूरा पैसा व समय का पूरा मूल्य वसूल करवाने में सफल रहे हैं, जिसके लिए उन्हें दिल से बधाईयां ।
रही बात कमियां निकालने की तो उसके अनगिनत रूप हैं । जिसके लिए मेरा विचार है "fault की स्पेलिंग में ही fault है" । किसी भी उपन्यास का हमें पसंद आने का एक ही पैमाना है कि वह हमारी उम्मीदों पर खरा उतरे । इसके लिए लेखक महोदय ने अपना शत -प्रतिशत दिया है ।
रोमांच,हॉरर,रोमांस आदि स्वादानुसार है । हाँ कमजोर हृदय वालों को अवश्य ही यह उपन्यास अवश्य ही विचलित कर देगा ।
कहानी एक अज्ञात ख़ज़ाने की खोज से शुरू होती हुई ,एक रहस्यमय ट्रैन के उसके गंतव्य तक पहुंचने की जद्दोजहद की है । सब कुछ एक व्यवस्थित तरीके से होता है । वह ट्रैन कोई सामान्य ट्रेन नहीं बल्कि आधुनिक सुविधाओं से लैश एक बुलेट ट्रेन है । उपन्यास अपने शबाब पर तब आता है जब ट्रेन के रास्ते में आती है एक सुरंग । उसके बाद शुरू होता है भय और रोमांच का एक नया सफर । जो कि बिल्कुल नया है और वाकई में हॉलीवुड मूवी को टक्कर देने की क्षमता रखता है ।
और अंत !!!
अवश्य ही आपको यकीन दिला कर ही मानेगा कि लेखक का दावा बिल्कुल उचित है ।
उपन्यास में बहुत कुछ है जो नवीनता और मौलिकता की छाप दिखाता है । क्लाइमेक्स का रहस्य गज़ब का है , जो हमें लेखक से पूछने पर विवश कर देगा 'आपकी अगली किताब कब आ रही है?"
हम लोग तो वह हैं जिनको पढ़ने का इतना तगड़ा वाला क्रेज़ है कि कुछ पढ़ने को न मिला तो बस/ट्रैन/कार में बैठे बैठे , रोड के किनारे की दीवारों,खंभों,मकानों पर लगे विज्ञापन भी पढ़ते रहे हैं और तो और सामने वाले से अखबार भी छीनकर जल्दी से पढ़ लेने का हुनर बचपन से है । क्या मजाल की हमारा पड़ोसी हमसे पहले अखबार पढ़ ले भले ही पैसा वही दे रहा हो । तो भैया हम तो किसी लेखक की किताब का नुक्स तो निकलने से रहा (दिखेगा तब तो बताया जाएगा), हां खूबियां कोई छिपने न देंगे ।
लेखेक के स्वर्णिम भविष्य के लिए शुभकामनाएं और फ्लाई ड्रीम्स को भी तहे 'दिलसे' धन्यवाद ।
रेटिंग :- 8/10 (मेरे नज़रिए से )
समीक्षक : मनेंद्र त्रिपाठीजी

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