उपन्यास:- मौत की छाया (सुनील सीरीज 53)
लेखक:- सुरेंद्र मोहन पाठक
सुनील सीरीज जब पढ़ना शुरू किया था तब से ही सुनील का फैन हो गया था वैसे तो पाठक जी ने एक से बढ़कर एक कहानियाँ सुनील की लिखी है लेकिन इस कहानी में जो कसावट, सस्पेंस और सुनील के शानदार एक्शन दिखाए गए है वो दूसरी कहानियों से इसे अलग बनाते है।
बलास्ट अखबार का रिपोर्टर सुनील कुमार चक्रवर्ती जिसके एडिटर का मानना है कि सुनील अगर किसी साधारण खबर के पीछे लग गया तो उसमें भी कोई धमाका खोज निकालेगा, वो उसे एक लड़की की मौत के बारे में बताता है और उसकी तहकीकात करने बोलता है, लड़की कौन है उसकी मौत कैसे हुई इस बात को गोपनीय रखने की पुलिस पूरी कोशिश कर रही थी, एडिटर राय को शक है कि लड़की की मौत साधारण नही है और लड़की भी साधारण नही है (किसी बड़े रसूखदार खानदान से सम्बंध रखती है)
सुनील को तहकीकात के दौरान पता चलता है कि लड़की सांसद मुकुट बिहारी की इकलौती औलाद रंजीता गुप्ता है और वो ड्रग एडिक्ट भी थी।
ड्रग कनेक्शन आने पर कहानी का पहलू ख़ूनी और ड्रग माफिया को पकड़ने के लिए सुनील की जदोजहद में बदल जाता है।
घुमावदार कथानक के बीच सुनील आखिरकार कातिल का पता लगा लेता है।
क्यों पढ़े:- अगर आप सुरेंद्र मोहन पाठक और सुनील के फैन है।
उसके अलावा एक बेहतरीन क्राइम थ्रिलर से मरहूम नही रहना चाहते।
तब आपको ये उपन्यास जरूर पढ़ना चाहिए।
क्यों न पढ़ें:- ये तो गैर जरूरी बात हो गई पाठक जी ने इतनी खूबसूरती से इस उपन्यास को लिखा है कोई भी उपन्यास प्रेमी इसे पढ़ने से इनकार नही कर सकता।
वैसे तो सुनील की तारीफ करने की और इच्छा हो रही है लेकिन फिलहाल इतना ही।
अमितेष प्रताप सिंह

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