मुम्बई 03:02 लेखक-मैनाक धर

उपन्यास-मुम्बई 03:02
(मूल रूप में अंग्रेजी में लिखित,हिंदी अनुवाद भी उपलब्ध)
लेखक-मैनाक धर
हिंदी अनुवाद-उर्मिला गुप्ता
प्रकाशक-वेस्टलैंड प्रकाशन
किंडल अनलिमिटेड पर उपलब्ध
समीक्षा-आज़ाद यादव



क्या होगा अगर अचानक से आपका मोबाइल काम करना बंद कर दे?
क्या होगा अगर सारी दुनिया से बिजली चली जाये?
या आज के समय के सबसे महत्वपूर्ण साधन या संसाधन अचानक से काम करना बंद कर दे?
आपके पास भोजन व पानी ना हो?
रविवार की सुबह 03:02 बजे, जिस दुनिया को हम जानते थे उसका अंत हो गया। मुंबई अचानक काली हो गई - न बिजली, न फोन, न इंटरनेट और न ही काम करने वाली कारें,आपका पैसा या सामाजिक रुतबा किसी काम का नही।एक युद्ध जो सीमाओं पर या सेना द्वारा नहीं, बल्कि हमारे घरों और गलियों में, हमारे साथ सैनिकों के रूप में छेड़ा जाना था।
लेखक मैनाक धर की मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी हुई व उर्मिला गुप्ता द्वारा अनुवादित उपन्यास मुम्बई तीन बजकर दो मिनट पढ़ते हुये आपको ऐसा महसूस होगा जैसे आप कोई हॉलीवुड की एक्शन फ़िल्म देख रहे हो वो भी बिना पलक झपकाये।
आपको उपन्यास पड़ते वक्त ब्रूस विलिस की डाइ हार्ड याद आ जायेगी लेकिन उसका इस उपन्यास की कहानी से कुछ लेना देना नही है सिवाय हमले के,उसमे साइबर हमला होता है और इसमें??
कहानी है आदित्य की जो अपने हालिया प्रमोशन का भरपूर आनंद उठाना चाहता है और शाम को दोस्तो के साथ अपने प्रमोशन को सेलिब्रेट करता है लेकिन उसी रात तीन बजकर दो मिनट पर कुछ ऐसा होता है जिसके सामने उसके हाल ही में मिले सबसे बड़े प्रमोशन की कोई अहमियत नही रह जाती है,अहमियत रहती है तो बस कैसे भी जीवित रहने की।
मैनाक धर ने जिस खूबसूरती और बारीकी से उपन्यास में घटनाक्रम पिरोये है वो आपको हतप्रभ करने के लिये काफी है,आज के टेक युग की समस्याओं को सामने रखकर एक जबरदस्त एक्शन थ्रिलर उपन्यास लिखा है।
उपन्यास बहुत ही ज्यादा रोमांचक है और उतने ही गहरे है उपन्यास के संवाद।
रेटिंग - 4.5/5

(आज़ाद यादव)

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