खून के आंसू- विक्रम शर्मा



खून के आँसू , विक्रम शर्मा की चमत्कारी लेखनी का एक नायाब तोहफा है । यह देवा पंडित सीरीज का तीसरा उपन्यास है । कहानी वक़्त के हिसाब से काफी बेहतरीन लिखी गयी है ।



इंग्लैंड में पढ़ने के लिए गया हुआ एक भारतीय राजघराने का युवक वीरेंद्र राय जब अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद वापस भारत आता है तो उसके साथ उसकी पत्नी भी होती है जिससे उसने अभी हाल ही में ही इंग्लैंड में विवाह किया हुआ होता है । 


इसके तुरंत बाद ही उसी दिन उसके महल  के  सबसे विश्वासपात्र नौकर का कत्ल हो जाता है 

महल में उस समय बिजली के तार न होने की वजह से बिजली कटी होती है । और चौंकाने वाली बात यह होती है कि उस नौकर का कत्ल करंट लगने से होता है ।


अब उस नौकर में भी रहस्य का पिटारा है ।


साथ ही आगे यह भी पता चलता है कि किसी साजिश के चलते ही वीरेंद्र राय के खानदान के सारे लोग, माता पिता दादा दादी । एक एक करके कत्ल किये गए थे ।


उनके खानदान से खार खाये बैठे एक आदमी की एंट्री भी कहानी में होती है । कहानी उलझ जाती है ।


अब शुरू होती है महल में भूत लीला ।


उसके बाद कहानी में आती है उस राजसी खानदान के जुल्मों की शिकार एक महिला ।


कहानी और ज्यादा जटिल तब हो जाती है जब वीरेंद्र राय के चाचा तथा चचेरे भाई के कुछ रहस्य सामने आते हैं ।


उपन्यास के 60% की समाप्ति पर आगमन होता है देवा पंडित का । देवा पंडित के कार्य करने के तरीके पर पाठक सोच में पढ़ जाएगा । इनको आप नर-विभा जिंदल की उपाधि से भी नवाज सकते हैं । जिनके इन्वेस्टीगेशन में कहीं भी लूप होल नहीं ढूंढ सकते हैं । देवा पंडित आते ही सारे रहस्यों से इत्मीनान के साथ एक के बाद एक पर्दे उठाते हैं ।



यह उन चुनिंदा उपन्यासों में से एक है जिसको पढ़ने के बाद आप अवश्य कहेंगे " उपन्यास की रफ्तार इतनी तेज!!!  भाई कुछ कम कर "


अंत में असली अपराधी तथा कहानी का असली खेल सामने आता है "चौंकाने वाले तथ्य के साथ ।



उपन्यास कम से कम 2 बार पढ़ने योग्य


अंक:- 10 में से 8

 समीक्षा : मनेंद्र त्रिपाठी

5 comments:

  1. जबरदस्त समीक्षा

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  2. अच्छी कहानी है

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  3. शानदार थ्रिलर जिसका अंत बहुत ही रोमांच लिए है।

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  4. जबरदस्त उपन्यास है लॉस्ट तक बाँधे रखता है

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  5. बहुत ही बढ़िया समीक्षा लाजवाब उपन्यास

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