उपन्यास - अनदेखा खतरा
लेखक - संतोष पाठक
यह एक जासूसी उपन्यास है।
कहानी की शुरुआत लाल हवेली में रह रही जूही नाम की लड़की से शुरू होती है जिसे हर वक्त ऐसा लगता है जैसे उसे कोई मारना चाहता है हवेली में अजीबोगरीब घटनाएं घटती रहती हैं कभी भूत प्रेत दिखते हैं तो कभी नर कंकाल तो कभी उसे गोली मारकर कोई उसकी हत्या करना चाहता है लेकिन लाल हवेली में रह रहे उसके चचेरे भाई प्रकाश को ना तो भूत प्रेत दिखते हैं ना ही नर कंकाल और न गोली की आवाज सुनाई देती है यह घटना जूही के पिता राम सिंह के मरने के बाद से शुरू होती है राम सिंह की मौत तब होती है जब उनके यहां एक बहुत बड़ी पार्टी चल रही होती है उनकी मौत हवेली से नीचे गिरने की वजह से होती है इसे एक हादसा माना जाता है और फिर जूही के साथ अजीबोगरीब घटनाएं शुरू होती है तब जूही अपनी सहेली शीला को बुलाती है शीला के आने पर जूही को कुछ तसल्ली मिलती है लेकिन फिर भी डर और खौफ बना रहता है फिर शीला प्राइवेट जासूस विक्रांत को बुलाती है और फिर विक्रांत का जासूसी सफर शुरू होता है हवेली में घट रही अजीबोगरीब घटनाओं और रहस्य से पर्दा हटाने के लिए
1 लाल हवेली का रहस्य क्या था
2 जूही की हत्या कौन करना चाहता है
3 क्या जूही के पिता रामसिंह हादसे में मरे या फिर किसी ने उन्हें मार दिया आखिर कौन है जिसने राम सिंह की हत्या की
4 नर कंकाल और भूतों का चक्कर क्या है
5 क्या सच में लाल हवेली में भूतों का निवास है या फिर कोई गहरा षड्यंत्र
6 कौन है इस षड्यंत्र का सूत्रधार और इतना बड़ा षड्यंत्र रचने के पीछे उसका क्या मकसद है
7 क्या जासूस विक्रांत इन सभी षड्यंत्र और रहस्यों से पर्दा हटा सका या फिर वह भी षड्यंत्र का शिकार हो गया
ऐसे ही अनेकों सवालों के जवाब पाने के लिए आपको उपन्यास पढ़ना पड़ेगा
मुझे विक्रांत और शीला की नोकझोंक अच्छी लगी और जो नहीं अच्छा लगा वो दिलावर सिंह जैसे खतरनाक डॉन जिसकी धौंस पुलिस वालों के ऊपर तक है उसका इतनी आसानी से मर जाना बाकी पूरा उपन्यास बहुत ही अच्छा है और आपको शुरू से लेकर अंत तक बांधकर रखेगा और अंत चौंकाने वाला है
समीक्षक- डॉ राज वर्मा

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