वो भयानक रात - मिथिलेश गुप्ता

उपन्यास - वो भयानक रात

लेखक - मिथिलेश गुप्ता



लेखक का यह प्रथम उपन्यास है जो सच्ची घटना पर आधारित है ।लेखक ने एक हॉरर उपन्यास से शुरुआत की है। और अपने पहले ही उपन्यास से पाठको को डराने में कामयाब हुवे है ।

क्या हो अगर सुनसान रात में आपका सामना अचानक किसी भूत प्रेत या आत्मा से हो जाये?
इस उपन्यास का प्रारम्भ ऐसी ही एक हैरतअंगेज घटना से होता है जब संग्राम सिंह का परिवार का सामना अज्ञात शक्तियों से होता है
जो अमावस की भयानक मनहूस काली रात में अपने एक दोस्त की बेटी की शादी से एक भयानक जंगल के रास्ते से होकर घर वापस आ रहे होते हैं ।तभी गाड़ी चला रहे राहुल के सामने कोई चीज अचानक से आती है और गाड़ी  एक पेड से टकरा जाती है लेकिन किसी को गंभीर चोट नहीं आती और हैरानी तो तब होती है जब वह गाड़ी से टकराने वाले की खोज करते हैं तो उन्हें आसपास कुछ भी नहीं मिलता है । और  उनके साथ एक के बाद एक ऐसी ऐसी घटनाएं घटित होती हैं जो रीढ़ की हड्डी तक में सिहरन पैदा कर दें  
क्या संग्राम सिंह का परिवार उस मनहूस जंगल से बाहर निकल सका या फिर जंगल में घट रही घटनाओं का शिकार हो गया? और उनके साथ क्या हुआ ? यही इस  उपन्यास की केंद्रीय विषय वस्तु है ।
उपन्यास शुरू से अंत तक रोचक है और कई घटनाक्रम काफी डरावने है ।हॉरर उपन्यास की श्रेणी में इसका कथानक अत्यंत नवीन और सत्य घटना पर आधारित होने से पाठको की कौतूहलता को बढ़ाता है । उपन्यास में एक ही कमी लगी कि  इसका  अंत और भी अच्छा बनाया जा सकता था । लेखक पाठको को शुरू से अंत तक "हॉरर "का थ्रिल देने में सफल हुवे है ।


                     समीक्षक -  डॉ राज वर्मा

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