उपन्यास:- तिलक रोड का भूत (कमांडर करण सक्सेना सीरीज)
लेखक:- अमित खान
प्रकाशक:- सुमन पॉकेट बुक्स
मुंबई की घनी आबादी के बीचों बीच तिलक रोड एक ऐसी जगह जहां शाम का अंधियारा घिरते ही लोगों की आवाजाही बंद हो जाती है, कारण तिलक रोड में एक भूत का आतंक! जिसके बारे में कहा जाता है की वो किसी कैप्टन का भूत है जिसकी दो साल पहले तिलक रोड पर एक एक्सीडेंट में मौत हो चुकी थी और वो अपनी मौत का बदला वहां से गुजरने वालों से लेता है।
2 सालों में लगभग दर्जन भर मौत उस भूत के द्वारा हो चुकी रहती है और पुलिस भी इस रहस्य को सुलझाने में नाकाम रहती है इसलिए तिलक रोड में आवाजाही शाम होते ही रुकवा दी जाती है।
इस केस में "आग में घी" तब पड़ता है ,जब एक विदेशी उच्चायुक्त तिलक रोड के भूत का शिकार हो जाता है तब इस केस को सरकार द्वारा सीआईडी को सौपा जाता है और सीआईडी का होनहार ऑफिसर कमांडर करण सक्सेना केस की खोजबीन में जुट जाता है।
तहकीकात के दौरान उसका सामना बार बार स्पाइडर नामक गैंग से होता है, भूत की गुत्थी के साथ स्पाइडर का रहस्य भी सुलझाने में वो लग जाता है।
★तिलक रोड के भूत का क्या रहस्य था?
★भूत की गुत्थी सुलझाने में करण सक्सेना ने क्या क्या पापड़ बेले?
★स्पाइडर गैंग का उद्देश्य क्या था?
★तिलक रोड और स्पाइडर गैंग का क्या कनेक्शन था?
इन सब सवालों का जवाब जानने के लिए इस उपन्यास को पढ़ा जा सकता है।
मेरी रेटिंग 07/10
अमितेष प्रताप सिंह

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