उपन्यास-द ट्रेल
लेखक-अजिंक्यशर्मा
किंडल अनलिमिटेड पर उपलब्ध
आज़ाद सिंह यादव
हमेशा अपराधी मौके वारदात पर कोई ना कोई सबूत छोड़ता है जिसकी मदद से वो कानून के चंगुल में आ ही जाता है लेकिन क्या हो जब ट्रेल गलत मिले या मिले ही ना???
लेखक अजिंक्य शर्मा का सातवां उपन्यास है द ट्रेल।
एक अजीब सी मर्डर मिस्ट्री जिसमे मर्डर कैसे हुआ यही समझ मे नही आता है क्यो हुआ और किसने किया ये तो बाद कि बात है।
द ट्रेल आपको अपने सम्मोहन के जादू में बांधने में कामयाब है,सब कुछ है रहस्य है,रोमांच है,तो रोमांस भी है,कोरोना है,ताज है,ताज का राज है,तो लेखक स्वयं भी है,मतलब की पूरा मसाला है।
एक मर्डर होता है जिसमे पुलिस को कोई ट्रेल नही मिलता है या बोल सकते है कि ट्रेल मिलता है जिसका कोई मतलब नही होता है।कहानी बहुत ही दमदार तरीके आगे बढ़ती है और अंत तक पाठक को बाधने में कामयाब है।
पूरे नावेल में मुझे बस पुलिस की कार्यप्रणाली नावेल की कमजोर कड़ी जान पड़ी है पूरे नावेल में जहाँ पुलिस जानबूझकर इंसानियत दिखती फिर रही है और यही मेरी नजर में नावेल का सबसे बड़ा माईनस प्वाइंट है।इतने हिंट या ट्रेल के बावजूद भी इतना सुस्त पुलिसिया इन्वेस्टिगेशन????
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